आकाश-दीप
"बन्दी! " "क्या है? सोने दो।" "मुक्त होना चाहते हो?" "अभी नहीं, निद्रा खुलने पर, चुप रहो।" "फिर अवसर न मिलेगा।" "बड़ा शीत है, कहीं से एक कम्बल डाल कर कोई शीत से मुक्त करता।" "आँधी की सम्भावना है। यही अवसर है। आज मेरे बंधन शिथिल हैं।"
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