रघुवंश
जिस तरह वाणी और अर्थ एक दूसरे को छोड़ कर कभी अलग अलग नहीं रहते उसी तरह संसार के माता-पिता, पार्वती और परमेश्वर भी, अलग अलग नहीं रहते; सदा साथ ही साथ रहते हैं। इसीसे मैं उनको नमस्कार करता हूँ। मैं चाहता हूँ कि मुझे शब्दार्थ का अच्छा ज्ञान हो जाय।
यह टेक्स्ट तुम्हेंं एक बार में एक शब्द में पढ़ा जाता है। गलती के बाद तुम्हेंं टाइप करने के लिए अक्षर और बाकी शब्द सुनाई देते हैं।